0*पांच किलोमीटर पैदल चल कर आते हैं तब मिलता है गांव वालों को राशन*
0*बारिश भर अंधेरे में बिताते हैं रात*
0*गम्भीर बिमार होने पर खाट पर ढो कर लाते हैं मरीजो को ग्रामीण*
0*वर्षो बाद भी मूल भूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं पहाड़ कोरजा के 250 ग्रामीण*
0*बारिश होने बच्चे मिडिल स्कूल में पढ़ाई के लिए नहीं जा पाते हैं स्कूल*
बसंत यादव डाँड़गांव। सरगुजा जिले के उदयपुर विकास खंड में आज भी एक गांव दुर्गम वन क्षेत्र का ग्राम पंचायत पेडरक्खी के आश्रित ग्राम पहाड़ कोरजा बसा हुआ है। यह ऐसा गांव है तो सदियों से पहुँच विहीन का अभिशाप झेल रहा हैं।जहाँ आज भी आभाव गरीब आदिवासी समुदाय के लोग जिल्द भरी जिंदगी लगभग 250 लोग जीने को विवश हैं। जहाँ।मूल भूत सुविधाओं के लिएवर्षों से तरस रहे हैं। विशेष आदिवासी समुदाय मझवार लोग दुर्गम वन आँचल वन क्षेत्र में तरस रहे हैं।कई मांगे के बाद भी नहीं मिली आवागमन तक कि सुविधाये।
बारिश शुरू होते ही यह गांव पहुँच विहीन वन क्षेत्र में आ जाता है।जहाँ कुल 42नरकीय जीवन जीने को विवश हैं। कुल42परिवार है जिसमें 41 परिवार मझवार आदिवासी 1 परिवार पिछड़ा वर्ग बारगाह जाती के लगभग 250 लोग निवास करते हैं। जहां विगत वर्ष 10 जुलाई को मोटरसाइकिल पर सवार होकर तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर भोस्कर विलास संदीपन ने दल बल के साथ आये थे और पहुच विहीन का भ्रमण कर के अभिशाप के मुक्ति दिलाने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया गया था।उस समय ग्रामीणों ने कलेक्टर का आभार जताया था।औऱ जिंदगी बदलने का पूरा भरोसा था लेकिन आज भी हालत जस की तस बनी हुई है जिससे एक साल बाद भी कुछ ना होने पर ग्रामीणों में चारों ओर निराशा छाया हुआ है।अब लोगों को विकास की उम्मीद टूटने लगी है।
पकडण्डी रास्ते से 5 किलोमीटर पैदल चल कर लेने आते हैं बारिश के दिनों में राशन
जैसे ही बारिश शुरू होती है पूरे चार माह यहाँ के ग्रामीणों को जिल्द भरी जिंदगी जीते हैं पकडण्डी रास्ता होने के साथ साथ पहाड़ कोरजा एंव पेडरक्खी मार्ग के बीच पड़ने वाले दो नालो में पानी भर जाता है जिस कारण आवागमन बाधित हो जाता है।जगह जगह रास्ते कट जाते हैं।जिससे ग्राम पंचायत मुख्यालय एवं ब्लाक मुख्यालय से इस गांव का सम्पर्क टूट जाता है।यहाँ के लोग लगभग 5 किलोमीटर पैदल सफर तय कर राशन लेने पहुचते ग्राम पंचायत मुख्यालय पेडरक्खी में बारिश के दिनों में रास्ते में पड़ने वाले दो नालों में पुलिया के अभाव में भर जाता है पानी।
कई बार बड़े अधिकारियों का भी गांव में हुआ दौरा लेकिन गांव वालों को नहीं मिला कोई लाभ।
बारिश के दिनों में मिडिल स्कूल की पढ़ाई एवं बिमार होने पर परेशान होते हैं ग्रामीण एवं बच्चे जैसे ही बारिस शुरू होता है आश्रित ग्राम पहाड़ कोरजा के ग्रामीण एवं मिडिल स्कूल पढ़ाई करने वाले छात्र पूरे बरसात भर परेशान रहते हैं।गांव में सिर्फ प्रायमरी स्कूल तक पढ़ाई होती है। कक्षा 5 वी पास करने के बाद मिडिल स्कूल के पढ़ाई के लिए5 किलोमीटर दूर पेडरक्खी मिडिल स्कूल यहाँ के बच्चों को पढ़ाई करने जाना पड़ता है।लेकिन बारिश के कारण पुरे बरसात भर छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है।वहीँ अगर बारिश के दिनों में एक गोली भी लेना पड़े तबियत खराब होने पर तो 5 किलोमीटर दूर पेडरक्खी पैदल ग्रामीणों को पुलिया एवं सड़क के अभाव में आना पड़ता है और गंभीर बीमारी होने पर खाट में ढो कर मुख्य मार्ग तक लाते हैं।वही इस गांव में वन क्षेत्र होने के कारण मौसमी बीमारी के अलावा जंगली जनवरों का भी खतरा बना रहता है। प्राथमिक शाला में 15 बच्चे हैं यहाँ अत्यधिक बारिस होने के कारण टीचर बड़ी मुश्किल से जान जोखिम में डालकर पैदल नदी नाला पर कर बच्चों को पढ़ाने जाते हैं नाले में ज्यादा पानी होने पर स्कूल बंद करना भी पड़ता है। वर्तमान में दो शिक्षक विद्यालय में पदस्थ हैं।
गांव में छा जाता है पूरे गांव में अधेला।
गांव में सोलर पैनल लाईट लगा हुआ है लेकिन यह गांव वन क्षेत्र से ढका हुआ है।जिस कारण पैनल चार्ज नहीं होता है।जिससे रात भर पूरे गांव में अधेला रहता है।जिससे जंगली जानवरों के अलावा साप बिच्छू एव जंगली हाथियों का डर हमेशा बना रहता है।
पूरे गांव में नेटवर्क की बनी रहती है समस्या।
वन क्षेत्र में जीवो मोबाइल फोन का टॉवर लगा हुआ है लेकिन हर समय ग्रामीणों को नेटवर्किंग की समस्या बनी रहती है कोई दिक्कत आने पर पंचायत मुख्यालय तक सम्पर्क टूट जाता है जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन शासन से पुनः पहुंच विहिप अभिशाप से मुक्ति दिलवाने के लिए सड़क एव रास्ते में पड़ने वाले दोनों नालों में पुल बनाने की मांग की है।ताकि ये आदिवासी परिवार विकास के मुख्य धरा से जुड़ सके।
पहाड़ी कोरजा गांव पहुंच विहीन गांव है। जो वन क्षेत्र में आता है पूल निर्माण के लिए अन्य विभाग से सर्वेक्षण का कार्य किया गया है। इस सम्बन्ध में उच्च अधिकारयों को अवगत कराया जायेगा।
शैलेन्द्र भारतीय एसडीओ आर ई एस उदयपुर




















