आज भी रामगढ़ की पहचान देश ,विदेश में है धार्मिक एवं पर्यटन के दृष्टिकोण से।
बसंत यादव डाँड़ गांव । सरगुजा जिले के उदयपुर विकास खंड में जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर स्थित रामगढ़ पर्वत स्थित है।जो धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के दृष्टिकोण से जिसकी पहचान देश विदेश तक है। यह पर्वत माला की ऊँचाई 1017 फिट 308 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इसका दूसरा नाम रामगिरी पर्वत के नाम से जाना जाता था।यह दण्डकारण्य वन क्षेत्र में आता है।14 वर्ष वनवास के बाद राम,लक्षण सीता यहाँ से पंचवटी नामक स्थान पर आगे बढे थे।जो आज भी रामायण काल में उल्लेख है। इस पर्वत के चोटी पर चढ़ने के लिए प्राचीन समय से ही 631 सीढ़ियों का निर्माण किया गया है।रामगढ़ के पहाड़ी टॉप पर बहुत ही पुराना राम सीता जानकी का ये छोटा मंदिर है।इसके अलावा सोन तालाब, चंदन तलाब भी प्रकृति प्रददत है।ऐसा मान्यता है कि इसी सोन तलाब से प्रभु श्रीराम स्नान करने प्रति दिन जाते थे।चंदन तलाब से चंदन घिसते थे।
सीता बेंगरा, जोगी गुफा, लक्षण गुफा आज भी वनवास के प्रमाण है।
जब वनवास के समय राम चन्द्र जी रामगढ़ में रुके थे उस समय माता सीता के रुकने के लिए सीता बेंगरा बना हुआ है।जो प्राचितम नाट्य शाला के रूप में भी जाना जाता है।इसके अलावा लक्षण गुफा भी कुछ ही दूर पर स्थित जहाँ लक्षण जी वनवास के समय रहते थे और माता सीता की रक्षा करते थे। जोगी माडा भी इसी गुफा के समीप स्थित है।
रावण के पैर के निशान एवं लक्षण रेखा भी यही मिलता है।
यहाँ के लोगो की मान्यता है कि वनवास के समय सीता बेंगरा के गुफा में आज भी प्रत्यक्ष रूप में रावण के पैर के निशान एवं लक्षण रेखा देखने को मिलता है।जहाँ रावण जोगी का भेष बदल कर सीता जी को हरण करने आया था।
सिंह द्वारा एवं छोटेबड़े तुर्रा रामगढ़ पर्वत का सोभा बढ़ाते हैं।
जैसे ही रामगढ़ पर्वत की पहाड़ी चढ़ते है पर्वत के रास्ते में ही प्रचीन समय में बना सिंह द्वारा था जो अब देख रेख के अभाव में जीर्ण शीर्ण हो गया है।वही छोटे तुर्रा एवं बड़े तुर्रा नामक स्थान भी पहाड़ी चढ़ने के दौरान रास्ते में पड़ता है।जहाँ श्रद्धालू चढ़ाई के दौरान रुक कर विश्राम करते थे।हर मौसम में वारो मासी पानी का स्रोत इन दोनों तुर्रा से निकलता था।जिससे लोग पानी पी कर तृप्त होते थे।
रामनवमी के समय भव्य मेले का होता है आयोजन जहाँ पूरे देश से पहुचते है लाखों लोग।
प्रत्येक वर्ष चैत्र नवरात्र रामनवी के समय रामगढ़ में विशेष पर्व के रूप में दर्शन पूजा पाठ दर्शन के लिए पूरे देश से आते लाखों लग जाते हैं।जहाँ सतमी अष्टमी, नवमीं को पूजा अर्चना के साथ भव्य मेले का आयोजन होता है।
रामगढ़ में ही मेघ दूतं महाकाव्य की रचना हुई थी।
प्रत्येक वर्ष राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा इसी रामगढ़ सीता बेंगरा नाट्य शाला के पास भव्य रूप से प्रथम। असाढ़ दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
विश्व विख्यात महा काब्य मेघ दूतं की रचना महा कवि काली दास जी रामगढ़ में रचना की थी जिसका प्रमाण आज भी इतिहास में मिलता है।इस लिए भी रामगढ़ का विशेष महत्व है।
रामगढ़ में बसा है मृगा डाँड़ नामक गाँव।
आज भी पुराणिक मान्यता के अनुसार जब बनवास के समय यहाँ भगवान रामचन्द्र जी रुके थे उस समय मृगों का शिकार के लिए वन में जाया करते थे।इस लिये आज भी मृगा डाँड़ नामक बस्ती बसी हुई है जहाँ पंडो जनजाति निवास करते हैं।
काग्रेस शासन कॉल में राम गमन पथ का हुआ है निर्माण।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र बघेल के विशेष प्रयास से रामगढ़ को रामपथ गमन मार्ग के रूप में जोड़ा गया था जहां ये बड़ी राम जी के प्रतिमा के अलावा पर्यटकों को ठहरने के लिए छोटे छोटे कमरों का निर्माण किया गया है।साथ ही सीढ़ी तक पहुचने के लिए करोड़ो रूपये का सीमेण्ट सड़क बनाया गया है।
आज भी रामगढ़ विकास से कोशों दूर है।
अभी भी रामगढ़ में विकास की अपार संभावनाएं हैं ताकि देश विदेश के पर्यटकों का रामगढ़ आगमन हो सके। अभी भी मंदिर के टॉप चोटी पर बिजली पानी का काफी आभाव है।जिससे शाम होते हैं चोटी पर चढ़ना मुश्किल हो जाता है साथ ही काफी ऊँची चढ़ाई होने के कारण बहुत से अशक्त बुजुर्गों के लिए पहाड़ी के चोटी पर चढ़ कर दर्शन करना मुश्किल हो जाता है कि लोग सीढ़िया खड़ी पहाड़ी होने के कारण नही चढ़ पाते हैं।रोपवे की आवश्कता है ताकि सभी लोग दर्शन कर सके।
आज ब्राम्ही लिपि में आज भी शिला लेख लिखा गया है। 2300 साल पुराने गुफाओं में आज भी प्राचीन चित्र कारी किया गया है ब्राम्ही लिपि में शीला लेख लिखा गया है जो आज भी इतिहास में दर्ज हैं।
वर्तमान सरकार के द्वारा भी अयोध्या के तर्ज पर मंदिर निर्माण कार्य किया जा रहा है।
धार्मिक दृष्टि से साय सरकार एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल की पहल पर रामगढ़ की तराई के निचे भव्य रूप से अयोध्या के तर्ज पर मंदिर का निर्माण किया जा रहा है जो अभी निर्माणाधीन है।पर्यटन मंत्री द्वारा लगातार रामगढ़ के विकास के लिए सड़क बिजली पानी सीढ़ी के लिए कार्य किया जा रहा है।
हथ फोड़ भी है अकर्षक का केंद्र।
सीता बेंगरा के ठीक नीचे हथ फोड़ नाला विशाल पहाड़ी को चीर कर निकली है जहां इतना विशाल पोला है कि एक साथ दर्जनों हाथी इसके अंदर से गुजर सकती है और बारो मास यहाँ हल्की पानी निकलते रहती है यह भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण के साथ साथ रामगढ़ के लिए आकर्षक का केंद्र बिंदु है।
विश्व विख्यात नाट्य शाला है रामगढ़ में।
भरत मुनि के अनुसार जो सीता बेंगरा का नाट्य शाला है पौराणिक कथाओं के अनुसार सबसे प्राचीन विश्व विख्यात नाट्य साला है।जहाँ जहां मेघ दूत की रचना इसी नाट्य साला से हुई थी पुरानी संस्कृति की हर बिधाएँ इस नाट्य शाला में झलकती थी 70,80 के दशक पूर्व इस नाट्य शाला में काली पथरों की मूर्तियां मिलती थी।जिसका पूजा पाठ किया जाता है।जो ये गुफाएं हैं तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का माना जाता है। उस समय सम्राट अशोक शासन काल खण्ड इसी व्यापक काल खंड में था।
आज भी हर रोज दर्शन के लिए के लिए रामगढ़ आते हैं लोग।
प्राचितम धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विख्यात रामगढ़ में प्रत्येक दिन जिले प्रदेश सहित अन्य राज्यो से श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए तांता लगा रहता है।लोग पैदल खड़ी पहाड़ी 631 सीढ़ी चढ़ कर राम सीता जानकी मंदिर का दर्शन करने जाते हैं।जो आज भी आस्था का केंद्र रामगढ़ बना हुआ है। बिजली, पानी एवं सीढ़ी खराब हो के कारण श्रद्धालुओं को दर्शन पूजा अर्चना में दिक्कत होती है।लाईट की व्यवस्था ना होने पर रात्रि में मंदिर का दर्शन नहीं हो पाता है।






















